100 साल पुराना कब्रिस्तान मामलाः केजरीवाल और मोदी सरकार आमने-सामने

डीकेएस डेस्क नई दिल्ली,
राजधानी में करीब सौ साल पुराने कब्रिस्तान को लेकर केन्द्र और दिल्ली सरकार आमने-सामने हैं। दोनों सरकारें कब्रिस्तान की जमीन पर अपना अपना दावा जता रही हैं।
मध्य दिल्ली में माता सुंदरी रोड स्थित एक कब्रिस्तान पर केन्द्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरु की है। जिसे केजरीवाल सरकार कानूनी और मालिकाना तौर पर गलत बता रही है।
दिल्ली सरकार की राजस्व सचिव मनीषा सक्सेना के मुताबिक कब्रिस्तान के ऐतिहासिक महत्व और अन्य तथ्यों के मद्देनजर इस जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।मनीषा सक्सेना ने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक आठ बीघा जमीन पर फैला कब्रिस्तान 1975 में अधिसूचित किया गया था। जिसमें इसे सौ साल पुराना बताया गया है। इस अधिसूचना को अब तक किसी भी सक्षम न्यायाधिकरण में चुनौती नहीं दी गई है। इसलिए वक्फ कानून के मुताबिक जमीन पर दिल्ली वक्फ बोर्ड का हक है।
अपना मालिकाना हक बताते हुए केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय यहां से अतिक्रमण हटाना चाहता है। फिलहाल विवादों के बीच इस कब्रिस्तान पर केन्द्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवायी शुरू की है। वहीं दूसरी तरफ आप विधायक अमानतुल्ला खान ने राजस्व विभाग के दस्तावेजी रिकॉर्ड के हवाले से कहा कि कब्रिस्तान की आठ बीघा जमीन पर दिल्ली वक्फ बोर्ड का मालिकाना हक है, इसके बावजूद भूमि एवं विकास विभाग यहां से अतिक्रमण के नाम पर बोर्ड के कर्मचारियों के आवास हटाना चाहता है। इससे पहले भी कई मुद्दों पर दिल्ली और केंद्र सरकार आमने-सामने आ चुकी हैं। दिल्ली सरकार लगातार आरोप लगाती रही है कि एलजी के जरिए केंद्र सरकार उन्हें काम करने से रोकती है। इसके अलावा पुलिस बल के नियंत्रण को लेकर भी दिल्ली सरकार केंद्र के सामने कई बार आ चुकी है।

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