संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की आलोचना


डीकेएस, नयी दिल्ली,
10 नवम्बर को संयुक्त राष्ट्र के एक शीर्ष विशेषज्ञ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय अभियान ’स्वच्छ भारत मिशन’ की आलोचना की। विशेषज्ञ ने कहा कि मिशन में ‘समग्र मानवाधिकार दृष्टिकोण’ का अभाव है। संयुक्त राष्ट्र के विशेष अधिकारी (यूएनएसआर) लियो हेल्लर ने एक संवाददाता सम्मेलन में अपने भारत दौरे पर एक प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जहां उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा शौचालय निर्माण को दिया जा रहा महत्त्व सभी के लिए पेयजल उपलब्ध कराने के मुद्दे को कमजोर न कर दे।
संयुक्त राष्ट्र के विशेष अधिकारी लियो हेल्लर के मुताबिक, बीते दो हफ्तों में मैंने ग्रामीण और शहरी इलाकों, झुग्गियों और पुनर्वास शिविरों का दौरा किया, जहां ऐसे लोग निवास करते हैं, जिनके बारे में ज्यादा सूचना नहीं मिलती। मैंने पाया कि इन प्रयासों में मानव अधिकारों के नजरिये की काफी कमी है। इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के उच्चायुक्त के कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति को सरकार की ओर से कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञप्ति में हेल्लर के हवाले से कहा गया, ’मैं जहां भी गया, मैंने स्वच्छ भारत मिशन का लोगो (महात्मा गांधी) के चश्मे को देखा। मिशन लागू होने के तीसरे साल में, अब यह जरूरी हो गया है कि उन चश्मों को मानव अधिकारों के लेंस से बदला जाए।’
स्वच्छ भारत मिशन के लोगो पर की गई टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार ने एक बयान जारी कर इसकी निंदा की और कहा कि यह हमारे राष्ट्रपिता के प्रति गहरी असंवेदनशीलता दर्शाता है।
बयान में कहा गया कि पूरा विश्व जानता है कि महात्मा गांधी मानवाधिकारों के प्रबल समर्थक थे।
हेल्लर ने कहा, स्वच्छता के लिए मानवाधिकारों के समग्र तरीके को अपनाने की बजाए एक अलग-थलग दृष्टिकोण अपनाया गया है।
उन्होंने सरकार से अपील की कि वह स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता के अपने राष्ट्रीय कार्यक्रमों में सभी स्तरों पर मानव अधिकारों का दृष्टिकोण प्रदान करें। हेल्लर ने आज देश में अपने दो सप्ताह लंबे दौरे का समापन किया। इस दौरान वह कई सरकारी अधिकारियों से मिले और नई दिल्ली, कोलकाता, इंफाल, लखन और मुंबई का दौरा किया जहां वह कुछ बस्तियों में भी गए।
उन्हें संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद द्वारा विभर में जल और स्वच्छता के मानवाधिकारों का निरीक्षण करने, रिपोर्ट और सुझााव देने का काम सौंपा गया था। उन्होंने कहा कि कुछ इलाकों में उन्होंने पाया कि अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को शौचालय के इस्तेमाल में भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
सरकार ने हेल्लर के प्रारंभिक परिणामों को खारिज करते हुए कहा, रिपोर्ट केवल दो सप्ताह के दौरे के आधार पर प्रस्तुत की गई है जिसमें कुछ राज्यों का क्षणिक दौरा किया गया और इसमें कुछ किस्से-कहानियों का संदर्भ शामिल किया गया है।
सरकार के निमंत्रण पर भारत आने वाले हेल्लर अपनी खोज पर संपूर्ण रिपोर्ट और सुझााव, सितंबर 2018 में मानव अधिकार परिषद के 39वें सत्र में जमा करेंगे।

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