लेखकों का मिलन मंच ‘विश्व पुस्तक मेला’ का समापन

नित्यानंद गायेन, नई दिल्ली,
राजधानी दिल्ली के प्रगति मैदान पर सप्ताह भर चला पुस्तक मेला रविवार, 14 जनवरी को समाप्त हो गया. मेले के पहले दिन से ही इसमें भारी भीड़ रहीं. देश विदेश के सैकड़ों प्रकाशक और लेखक इस मेला का हिस्सा बने, अनेक किताबों का विमोचन हुआ, कविता पाठ और साहित्यिक विमर्श चले पर इन सबसे बढ़ कर यह मेला लेखकों का बड़ा मिलन स्थल बना हर बार की तरह. किस लेखक या प्रकाशक की कितनी किताबें बिकीं इसका आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं हो पाया है . जिन लोगों की किताबों का लोकार्पण हुआ उनकी कितनी रचनाएं पाठकों को अगले वर्ष तक याद रहती है यह समय ही तय करेगा.
मेले में सबका अनुभव अलग -अलग रहा होगा . इस बार मेले के हिंदी वाले हॉल में धार्मिक संस्थाओं को भी स्टाल उपलब्ध करवायें गये थे . ये स्टाल सभी धर्मों के थे पर सबसे अनोखा यह था कि जब देश में अपराधिक दाग और मामले में लिप्त लोगों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने पर चर्चा चल रही है ऐसे में बलात्कार के मामले में जेल में बंद आसाराम की संस्था को भी स्टाल दिया गया इस मेले में और वे इस मेले में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और आसाराम का वीडियो चला रहे थे . इस संस्था के लोग और आसाराम के भक्त मेले में घूम -घूम कर बता रहे थे कि उनका बाप आसाराम भगवान है और वह निर्दोष है और जल्द ही बाहर आने वाला है !
इस मेले से लौट कर मध्य प्रदेश के साथी गोपाल राठी ने लिखा है ’अभी में दिल्ली में आयोजित विश्व पुस्तक मेला से लौटा हूँ. वहां नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा अभी हाल ही में प्रकशित किताब गांधी लोहिया दीनदयाल देखी. किताब का उद्देश्य दीनदयाल उपाध्याय को लोहिया और गांधी के समकक्ष खड़ा करना था. और दीनदयाल को गांधी जैसा महान पुरुष बताना था. संघी एक तरफ इस तरह की कोशिश कर रहे हैं तो दूसरी तरफ गांधी को खलनायक सिद्ध कर उनके प्रति युवाओ में नफरत का प्रचार प्रसार कर रहे है. इस फासिस्ट सोच का मुकाबला कैसे किया जाय ? इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए. संघियों द्वारा सोशल मीडिया पर प्रसारित यह वीडियो आपके अवलोकन हेतू प्रेषित किया जा रहा है ताकि आपको इनके मंसूबों का अंदाजा हो सके.’

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