मोदी सरकार में सामाजिक सुरक्षा खर्च में कटौती मगर वीआईपी सुरक्षा खर्च में बढ़ौतरी


-मुशर्रफ़ अली, नेहरु ने एक बार सोवियत संघ यात्रा के दौरान वहाँ सवाल पूछा कि आपके देश में वीआईपी कौन है? जवाब हैरान कर देने वाला था। बच्चे हमारे देश में वीआईपी होते हैं। अगर स्कूल की बस जा रही हो तो चैराहे पर राश्ट्रपति की कार को रोक दिया जाता है। पहले स्कूल बस निकलती है फिर राश्ट्रपति की कार को रास्ता दिया जाता है।
30 अप्रेल 2017 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने रेडियो पर दिए जाने वाले कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा कि लोगों ने जो वीआईपी संस्कृति अपने मन में बना रखी है उन्हें उससे बाहर आना चाहिए। नए भारत की अवधारणा में वीआईपी के स्थान पर ईआईपी आता है। ईआईपी का मतलब है एवरी पर्सन इम्पोरटेन्ट। उन्होने इस बात पर जार देते हुए कहा कि अगर सवा सौ करोड़ लोगों में हर व्यक्ति महत्वपूर्ण माना जाने लगे तो भारत हर चीज़ हासिल कर सकता है।
भारत में कुछ एजेन्सियों द्वारा वीवीआईपी, वीआईपी, राजनीतिज्ञ, उच्चकोटि के ख्यातिप्राप्त व्यक्ति तथा खिलाड़ियों को सुरक्षा प्रदान की जाती है। यह सुरक्षा एजेन्सियां जिनका नाम क्रमशः स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी), नेशनल सिक्यूरिटी गार्ड (एनएसजी) तथा सीआरपीएफ़ है। राश्ट्रपति, उपराश्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रिम कोर्ट तथा हाईकोर्ट के जज, राज्यपाल, मुख्यमंत्री व केबिनेट मंत्रियो को सरकार अपने आप सुरक्षा उपलब्ध
कराती है। सशस्त्र सेनाओं के अध्यक्ष को भी इसी तरह सुरक्षा मिलती है। वीवीआईपी को सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए एक कमेटी बनी हुई है जिसमें आईबी के अधिकारी, गृह सचिव व गृहमंत्री शामिल रहते हैं। राज्य सरकार की संस्तुति पर भी सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है। खतरे की अधिकता को देखकर केन्द्र और राज्य जो विशेश सुरक्षा उपलब्ध कराते है वह चार श्रेणियों में विभक्त है। एक्स, वाई, ज़ेड तथा जे़ड प्लस। ज़्ोड प्लस सुरक्षा सबसे उच्च श्रेणी की सुरक्षा है जो देश के अतिमहत्वपूर्ण लोगों जिसमें पूर्व व वर्तमान प्रधानमत्री आते है को उपलब्ध कराई जाती है। इसमें एसपीजी अतिरिक्त रहती है। एक्स श्रेणी में सभी आधारभूत सुरक्षा के साथ दो सुरक्षा कर्मी व एक निजी सुरक्षा अधिकारी उपलब्ध कराया जाता है। वाई श्रेणी में आने वाले व्यक्ति को 11 सुरक्षा गार्ड के अलावा दो निजी सुरक्षा अधिकारी दिए जाते हैं। ज़ेड श्रेणी में 22 सुरक्षा कर्मी, एक एस्कोर्ट कार तथा दिल्ली पुलिस या सीआरपीएफ़ द्वारा अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है। ज़ेड प्लस श्रेणी में जो ज़ेड श्रेणी वाले को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है उसमें एसपीजी को और जोड़ दिया जाता है इस तरह 36 निजी सुरक्षाकर्मियों के साथ अत्याधुनिकतम हथियार और सुरक्षा यंत्र साथ में रहते हैं।
यहां यह सवाल उठता है कि सरकार एक तरफ़ तो लगातार आम जनता की सब्सिडी में कटौती कर रही है वहीं उद्योगपतियों, राजनेताओं, धर्मगुरुओं, फ़िल्मी हीरो और खिलाड़ियों की सुरक्षा में पानी की तरह पैसा बहा रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अपनी मन की बात में एक
तरफ़ तो यह कहते हैं कि वीआईपी के स्थान पर ईआईपी होना चाहिए यानि एवरी इम्पोरटेंट पर्सन होना चाहिए। सभी लोगों को समान महत्व मिलना चाहिए यानि हर एक की जान की एक कीमत होनी चाहिए दूसरी ओर वह पहले से बनी हुई वीवीआईपी की सूची में सवा सौ आदमी और शामिल कर देते हैं जिससे खर्चे का बोझ और बढ़ जाता है। स्मरण रहे कि 7 फ़रवरी 2013 में दिल्ली सरकार ने सुप्रिमकोर्ट में बताया कि दिल्ली में 8049 पुलिसकर्मी वीआईपी सुरक्षा पर लगे हैं और उनपर सालाना 341 करोड़ रुपए 24 लाख 32 हज़ार करोड़ रुपए का खर्च वर्तमान वित्तीय वर्श में आया है। इसमे से 302 करोड़ 75 लाख 56 हज़ार रुपए सुरक्षा इकाइयों पर और 38 करोड़ 48 लाख 76 हज़ार करोड़ रुपए राश्ट्रपति भवन की सुरक्षा पर खर्च हुए। किन लोगों को सुरक्षा दी जा रही है उनके नाम अपने शपथपत्र में सरकार ने नही खोले लेकिन कितने लोगों को वीआईपी की सुरक्षा दी जा रही है उसकी सूची सीलबंद लिफ़ाफ़े में अदालत को सौंपी जिसमें 460 नाम थे।
सरकार ने अपने शपथपत्र में यह भी बताया कि 63 हज़ार 985 पुलिसकर्मी कानूनव्यवस्था बनाने और 3448 अपराध रोकने तथा जांच करने पर लगे हैं। इनमें से 5847 यातायात प्रबंधन तथा शेश वीआईपी सुरक्षा पर नियुक्त हैं। 844 राश्ट्रपति भवन की सुरक्षा पर लगे हैं।
पिछली कांग्रेस सरकार के दौर में 350 लोगों को वीआईपी सुरक्षा मिली हुई थी जो मोदी सरकार के आने पर 475 हो गई इसतरह 125 लोगों को और सुरक्षा दी गई। इनमें बाबा रामदेव, माता अमृत आनन्दमयी, महन्त नृत्यगोपाल दास और साक्षी जी महाराज के साथ-साथ राजनेता व उनके बच्चे, पुजारी और धार्मिक प्रवचन करने वाले शामिल हैं। पिछली सरकार में जेड-प्लस सुरक्षा की सूची में 26 लोग शामिल थे लेकिन मोदी सरकार ने वह सूची बढ़ाकर 50 कर दी। जेड़प्लस सुरक्षा का मतलब हर एक को 35 से 40 सुरक्षाकर्मी मिलना हैं। सुरक्षा श्रेणियों पर खर्च का अनुमान बताता है कि ज़ेड प्लस की सुरक्षा पर 36 सुरक्षाकर्मी जिसमें 10 से ज़्यादा राश्ट्रीय सुरक्षा गार्ड कमान्डो शामिल रहते हैं 25 लाख रुपए महीने का खर्च आता है। ज़ेड श्रेणी में 22 सुरक्षाकर्मी और 4 से 5 राश्ट्रीय सुरक्षा गार्ड कमान्डो शामिल हैं 20 लाख रुपए माहवार का खर्चा आता है। वाई श्रेणी की सुरक्षा में 11 सुरक्षाकर्मी जिनमें 1 से 2 कमान्डो व पुलिसकर्मी शामिल हैं 10 लाख रुपए प्रति माह का खर्चा आता है। एक्स श्रेणी जिसमें 2 से लेकर 5 सुरक्षाकर्मी, तथा गनर आता है उसपर 7 लाख रुपए महीने का खर्च आता है।
कहा जाता है कि राजनीतिक दबदबा दिखाने के लिए भी वीआईपी सुरक्षा हासिल की जाती है। सुरक्षाकर्मी अपने साथ रखना स्टेटस सिम्बल हो गया है वर्ना साधुओं, बाबाओं को किस बात का डर है जो वह सुरक्षा हासिल कर रहे हैं। वह साम्प्रदायिक नेता जो भड़काऊ बयान देकर जनता को असुरक्षित कर देते हैं खुद की सुरक्षा के लिए बहुत चिंतित रहते हैं। अगर ऐसे लोगों को सुरक्षा उपलब्ध नही कराई जाए तो साम्प्रदायिक दंगो और परस्पर पैदा होते द्वेश पर रोक लग सकती है। सुरक्षा के कारण जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वीआईपी सुरक्षा के नाम पर रास्ते जाम हो जाते हैं। हवाई जहाज़ की उड़ाने विलंबित व रद्द कर दी जाती है जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसी अनेक घटनाएं घटती रहती है जिनमें मरीज़ को अस्पताल तक पंहुचाने में देर हो जाने से उसकी मृत्यु हो गई है। हैरानी की बात यह है कि चुनाव के समय जब कोई नेता जनता के पास वोट मांगने जाता हैं तब लगता है कि जनता वीआईपी है और नेता साधारण लेकिन जैसे ही वह चुनाव जीतकर संसद या विधानसभा में पंहुचता हैं जनता साधारण और नेता वीवीआईपी हो जाता हैं। सुरक्षा के नाम पर पैसे की बर्बादी को रोकना चाहिए और केवल उन्हें ही सुरक्षा उपलब्ध करानी चाहिए जिनकी जान को सचमुच खतरा है। अगर कोई जनता पर दबदबा बनाने और स्टेटस सिम्बल के कारण सुरक्षा लेना चाह रहा है तो उसे जनता की कीमत पर नही खुद की कीमत पर सुरक्षा हासिल करनी चाहिए। जनता में नफ़रत पैदा करने और भड़काऊ भाशण देने वालों की सुरक्षा पर सरकारी खर्च पूरी तरह बंद होना चाहिए।

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