महाराष्ट्र में किसान सड़कों पर उतरे


डीकेएस डेस्क, 2 जून, नयी दिल्ली,
महाराष्ट्र के कम से कम सात जिलों के किसान सड़कों पर उतर आए हैं. गुरुवार 2 जून को सुबह से इन किसानों ने कृषि से जुड़े उत्पादों को लेकर जा रही गाड़ियों का चक्का जाम कर दिया ।
इन गाड़ियों के साथ तोड़-फोड़ करने की भी खबर है। इस आंदोलन को कई किसान संगठनों का समर्थन हासिल है. किसानों की मांग है कि उनके उत्पादों की अच्छी कीमत मिले और उनके कर्ज माफ किए जाएं।
सब्जियां, फल, दूध, पोल्ट्री से जुड़े उत्पाद और मांस लेकर मुंबई, पुणे, नाशिक और औरंगाबाद जा रही गाड़ियों को किसानों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है।
नाशिक से मुंबई और ठाणे में जरूरी चीजों की सप्लाई व्यापक पैमाने पर होती है। पर यहां के किसान भी 800 किलोमीटर से ज्यादा लंबे मुंबई-नागपुर समृद्धि कॉरिडोर के लिए खेती की जमीन अधिग्रहण किए जाने का विरोध कर रहे हैं।
इस आंदोलन में अहमदनगर, नाशिक, कोल्हापुर, सांगली, सोलापुर, नांदेड़ और जलगांव के किसान शामिल हैं। इन्हीं जिलों से पश्चिमी महाराष्ट्र, मुंबई, मराठवाड़ा और उत्तरी महाराष्ट्र में सब्जी, फल, दूध, पोल्ट्री से जुड़े उत्पाद और मांस की आपूर्ति होती है।
हड़ताल पूरे राज्य में है और 37 किसान संगठन शामिल । किसानों की मुख्य मांगें हैं -एक साल से किसानों की कर्ज माफी की मांग। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू हों। कृषि उपज पर खर्चे से खरीद की कीमत डेढ़ गुना हो।
बीती 29 मई को देर रात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी इन संगठनों के प्रतिनिधनियों की बैठक हुई लेकिन कोई हल नहीं निकला। 1 जून को कोल्हापुर के पास किसान प्रदर्शनकारियों ने वारना डेरी के दो टैंकरों को रोक कर उनके दूध को सड़क पर ही बहा दिया।
3 जून की सुबह मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया।

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