धर्म बदलने को किसी ने नहीं किया मजबूरः हादिया, हादिया को उसके माता-पिता अपने कब्जे में न रखेंः सुप्रीम कोर्ट


डीकेएस डेस्क, दिल्ली,
केरल के कथित लव जिहाद मामले में हादिया ने सुप्रीम कोर्ट में साफ तौर पर कहा, मुझे अपनी आजादी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने हादिया से कहा कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करें. अदालत ने कॉलेज से हादिया को फिर से दाखिला देने और हॉस्‍टल में जगह भी देने का निर्देश दिया। अब जनवरी के तीसरे हफ्ते में इस मामले की आगे की सुनवाई होगी। बता दें कि केरल की 24 वर्षीय हादिया (इस्लाम धर्म अपनाने वाली हिंदू महिला) ने शनिवार को भी कहा था कि वह अपने पति के साथ रहना चाहती है। हादिया ने इस्लाम कबूल कर शाफिन जहां नामक मुस्लिम युवक से शादी की है।
बता दें कि केरल हाई कोर्ट ने हादिया की मुसलमान लड़के के साथ शादी को ’रद्द’ घोषित करते हुए उसे पिता के हवाले करने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में टिप्पणी की थी कि लड़की बालिग है और उसकी इच्छा महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने कहा था कि बालिग होने की वजह से लड़की किसी के साथ भी जाने के लिए स्वतंत्र है। एनआईए ने इसके जवाब में कहा था कि उसे केरल में इस तरह के 89 मामलों में एक ही तरह का खास पैटर्न दिखा है। उधर, सुप्रीम कोर्ट के सामने पेशी के लिए रवाना होने से पहले हादिया ने केरल में रविवार को एक बार फिर दोहराया कि किसी ने भी उसे इस्लाम में धर्मांतरण के लिए मजबूर नहीं किया था। वह अपने 25 वर्षीय पति शफीन जहां के पास जाना चाहती है। बता दें कि अखिला अशोकन उर्फ हादिया ने कथित रूप से धर्म परिवर्तन कर शैफीन जहां नाम के एक शख्स से निकाह किया था। लड़की के पिता के. एम. अशोकन ने केरल हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर शादी रद्द करने की गुहार लगाई थी। याचिका में कहा गया था कि लड़की का जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया और लड़के (शैफीन) का संबंध आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट संगठन से है। इसमें आरोप लगाया था कि पीएफआई के सदस्य हिंदू लड़कियों को भ्रमित कर इस्लाम धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।
24 वर्षीय हादिया ने चिल्ला कर कहा कि ’मैं एक मुस्लिम हूं। मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं है। मैं अपने पति के साथ रहना चाहती हूं।’

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