दिल्ली में एक बाबा के ‘आध्यात्मिक यूनिवर्सिटी’ से छुड़ाई गईं 41 लड़कियां, लड़कियों को गुलाम बनाकर रखता था वीरेन्द्र देव


-नित्यानंद गायेन द्वारा सम्पादित, नई दिल्ली,
सिरसा के डेरा सच्चा सौदा के आश्रम के बाद देश की राजधानी दिल्ली के रोहिणी के विजय विहार में स्थित ’आध्यात्मिक विश्वविद्यालय’ के नाम पर चल रहे एक आश्रम से हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त टीम ने 9 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन में 41 लड़कियों को मुक्त कराया। दिल्ली हाईकोर्टके आदेश पर मंगलवार,19 दिसंबर को देर रात पुलिस ने आश्रम में छापेमारी की थी।
कई लोगों ने आरोप लगाया था कि बाबा यहां बंधक बना कर रखी गईं कम उम्र लड़कियों को दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न का शिकार बनाता रहा है।
दर्जन भर लड़कियों की शिकायत पर हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जब पुलिस और महिला आयोग की टीम ने वहां छापा मारा तो यह देखकर हैरान रह गई कि कैसे आश्रम में महिलाओं को कैद करके रखा जाता था। आश्रम में सात लोहे के गेट लगाए गए हैं और 18 तालों में महिलाओं को कैद करके रखा जाता था।
41 नाबालिग लड़कियों गुरुवार को आश्रम से नरेला के एक सामाजिक संस्था के शेल्टर होम में भेजा गया है। आश्रम में कई तरह की दवाएं मिली है जिनसे महिलाएं बेहोशी जैसी हालत में रहती थीं।
शुक्रवार,22 दिसम्बर को दिल्ली हाईकोर्ट में हुई इस मामले की सुनवाई में कोर्ट ने कहा है कि अगर आश्रम के संचालक वीरेंद्र देव दीक्षित के बारे में जानकारी नहीं पेश की गई तो वारंट जारी कर दिया जाएगा। कोर्ट ने इसके साथ ही दीक्षित के सभी 8 आश्रमों की लिस्ट भी मांगी है।
खबरों के मुताबिक आश्रम के संचालक वीरेंद्र देव दीक्षित मूलरुप से गुजरात का रहने वाला है। कई सालों तक ब्रह्मकुमारी आश्रम से जुड़े रहने के बाद इसने अपना आश्रम बनाना शुरु कर दिया। फर्रुखाबाद, बांदा और अहमदाबाद में भी इसके खिलाफ जालसाजी, आत्महत्या के लिए उकसाने और रेप जैसे मामले दर्ज हैं। ये बाबा खुद को कृष्ण का अवतार बताता है और महिलाओं को पटरानी।
इस रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने मीडिया को बताया कि इस आश्रम में बहुत ही संदिग्ध गतिविधियाँ चल रही हैं और है कोर्ट के पास रेप और सुसाइड की शिकायतें आई हैं, और स्थानीय निवासियों ने बताया कि वहां पर एक रैकेट चल रहा है, रात में गाड़ियाँ आती थीं जिनमें लड़कियों को भेजा जाता था। उन्होंने यह भी बताया कि इस छापेमारी के दौरान उनको और डीसीपी रैंक के पुलिस सहित बचाव दल के सदस्यों को करीब घंटे भर तक बंदी बना कर रखा गया। स्वाति मालीवाल ने बताया कि आश्रम से बड़ी मात्रा में इंजेक्शन और दवाइयां बरामद की गई हैं। जांच दल के मुताबिक विश्वविद्यालय में लड़कियों को लोहे की मजबूत सलाखों के पीछे जानवरों की तरह बांधकर रखा जाता है। रोहिणी में बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के आश्रम के पड़ोस में रहने वाली एक महिला ने मीडिया को बताया, ’पिछले 20-22 वर्षों में, कई शिकायतकर्ताओं ने पुलिस से संपर्क किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। मुझे मीडिया में आवाज उठाने के लिए धमकी भी दी गई थी, लेकिन मुझे डर नहीं था। मैं निर्दोष लड़कियों को बचाना चाहती थी।’
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस आध्यात्मिक विश्वविद्यालय और उसके संस्थापक वीरेन्द्र देव दीक्षित के खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त समिति ने हाईकोर्ट में जानकारी दी कि आश्रम में 100 से ज्यादा लड़कियों को बंधक बनाकर रखा गया है। इनमें से ज्यादातर नाबालिग हैं। समिति का कहना था कि उन्हें वहां अच्छे हालात नजर नहीं आए। समिति को ठीक से आश्रम का निरीक्षण नहीं करने दिया गया।
हाईकोर्ट के समक्ष रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तर प्रदेश में भी इस संस्था एवं इसके संचालक के खिलाफ मामला दर्ज है। हाईकोर्ट ने सीबीआई को कहा है कि दिल्ली व उत्तर प्रदेश में इनके खिलाफ लड़कियों की गुमशुदगी, बलात्कार एवं आत्महत्या के जो भी मुकदमे हों उनकी जांच करें और 17 जनवरी तक रिपोर्ट पेश करें।एक पीड़ित ने आरोप लगाया कि वीरेंद्र देव दीक्षित को 16000 महिलाएं रखने की ख्वाहिश थी। पीड़ित ने बताया कि लड़कियों को एक आश्रम से दूसरे आश्रम भेजा जाता था, ताकि वह अपनी पीड़ा किसी को बता न सके साथ ही किसी भी तरह का विद्रोह न हो सके। आश्रम की जांच के लिए जनहित याचिका दायर करने वाले एनजीओ की फाउंडर सीमा शर्मा के मुताबिक, कई लड़कियों ने बताया कि बाबा खुद को शिव बताता था। लड़कियों का ब्रेन वॉश कर दिया जाता था। बाबा लड़कियों से कहता था कि अगर वे उनसे शारीरिक संबंध बनाएंगी तो पार्वती बन जाएंगी और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी।
वीरेंद्र देव के खिलाफ एक युवती की ओर से रेप की रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने वहां छापेमारी की थी। इसी आश्रम में राजस्थान के झूंझनूं की एक युवती को जबरदस्ती रखने का आरोप भी संचालक पर लगा। 1998 में भी बाबा पर फरुखाबाद में दुष्कर्म का आरोप लगा था और उसकी गिरफ्तारी हुई थी।
एनडीटीवी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, एक 13 साल की लड़की बाबा के आश्रम में कई सालों तक रही। वह कभी दिल्ली में तो कभी राजस्थान में रही। लड़की के मुताबिक ’आश्रम में रात 10 से दो बजे तक केवल चार घंटे ही सोने को मिलता था। सोने से पहले और उठने के बाद बाबा को याद करने के लिए कहा जाता था। भोजन केवल एक बार मिलता था और शाम को केवल खिचड़ी देते थे। कुछ गलती हो जाए तो पिटाई होती थी। वहां पर गलती करने पर वे लोग दो-दो घंटे बाथरूम में बंद कर देते थे और पिटाई करते थे। बाबा एक या दो महीने में एक बार आता था। वह जब आता था तो लड़कियों को दूध में दवा दी जाती थी। कहा जाता था कि दवा शक्ति बढ़ाने की है जिसे बाबा का प्रसाद कहते हैं। उसे पीने के बाद बेचैनी होती थी। उसके बाद बाबा एक-एक करके लड़कियों को अपने कमरे में बुलाता था। कमरे के अंदर वह निर्वस्त्र बैठा होता था और लड़कियों को भी कपड़े निकालने के लिए बोलता था। फिर शरीर में यहां-वहां हाथ लगाता था और बोलता था कि मैं कृष्ण हूं और तुम मेरी गोपी हो। मैं शिव हूं, तुम पार्वती हो।’

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