ट्रंप ने गिरिजाघरों की राजनीतिक सीमाएं खत्म करने का संकल्प लिया

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वाशिंगटन, तीन फरवरी :एपी: धार्मिक स्वतंत्रता को ‘खतरे से घिरा हुआ’ बताते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बमुश्किल लागू किए जाने वाले आईआरएस नियम को रद्द करने का संकल्प लिया है। यह नियम कहता है कि उम्मीदवारों का समर्थन करने वाले पादरी उन्हें मिले कर में छूट के दर्जे को खतरे में डालते हैं।

कल नेशनल प्रेयर ब्रेकफास्ट के अवसर पर ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं जॉनसन संशोधन को पूरी तरह खत्म कर दूंगा और हमारे धार्मिक प्रतिनिधियों को यह अनुमति दूंगा कि वे स्वतंत्र तरीके और किसी प्रतिशोध के डर के बिना बोलंे।’’ नेशनल प्रेयर ब्रेकफास्ट एक उच्च स्तरीय समारोह होता है, जो धार्मिक नेताओं, राजनेताओं और पदाधिकारियों को एक मंच पर लाने का काम करता है।

ट्रंप का यह संकल्प दरअसल उन ईसाई समर्थकों के लिए था, जिन्होंने उन्हें व्हाइट हाउस तक पहुंचाने में अहम भूमिका अदा की। ट्रंप ने पहले भी इस नियम को निरस्त करने का वादा किया था लेकिन उन्होंने अभी तक इस संदर्भ में अपनी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी है।

तत्कालीन सीनेटर एल. जॉनसन के नाम पर बना यह नियम वर्ष 1954 से कल्याणार्थ संस्थाओं को कर में छूट देने के लिए चला आ रहा है। इन संस्थाओं में गिरिजाघर भी शामिल हैं। हालांकि यह बहुत दुर्लभ है कि गिरिजाघर को दंडित किया जाए।

संशोधन को खत्म करने के लिए कांग्रेस की ओर से कदम उठाया जाना जरूरी होगा। हालांकि ट्रंप सीधे तौर पर भी आईआरएस को यह नियम खत्म करने का आदेश दे सकते हैं।

इस नियम के तहत पूजा स्थलों को विभिन्न राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति है, जिनमें सामाजिक मुद्दों पर बोलना और वहां आने वाले लोगों को मतदान के लिए एकजुट करना शामिल है। लेकिन गिरिजाघर किसी उम्मीदवार का समर्थन नहीं कर सकते और दलगत पैरोकारी में शामिल नहीं हो सकते।

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