जिनेवा का नि:शस्त्रीकरण सम्मेलन इस विषय पर बातचीत के लिए उचित मंच : भारत

भाषा: भारत का कहना है कि परमाणु हथियारों पर पूर्ण प्रतिबंध पर वार्ता से जुड़े संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन से अलग रहना उसके लिए ‘‘आसान नहीं था’’ लेकिन उसे लगता है कि जिनेवा का नि:शस्त्रीकरण सम्मेलन :सीडी: ऐसे किसी भी एजेंडे पर बातचीत के लिए उचित मंच है।
नि:शस्त्रीकरण सम्मेलन में भारत के स्थाई प्रतिनिधि राजदूत अमनदीप सिंह गिल ने कल जिनेवा में कहा, ‘‘परमाणु नि:शस्त्रीकरण के मुद्दे पर बातचीत करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए यह सम्मेलन:यह सम्मेलन: एक उचित मंच है। उसके पास जनादेश है, सदस्यता है और परमाणु नि:शस्त्रीकरण के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए नियम हैं। इसी आधार पर, भारत इस सप्ताह से न्यूयॉर्क में परमाणु अस्त्र प्रतिबंध पर हो रहे सम्मेलन में भाग नहीं ले रहा है।’’ परमाणु अस्त्रों पर पूर्ण प्रतिबंध के उद्देश्य से हो रहे संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में भारत हिस्सा नहीं ले रहा है। अमेरिका, चीन, ब्रिटेन और रूस ने भी इस वार्ता का बहिष्कार किया है। न्यूयॉर्क में 27 मार्च से शुरू हुआ यह सम्मेलन 31 मार्च तक चलेगा।

गिल ने कहा, सम्मेलन से अलग रहने का फैसला ‘‘भारत के लिए आसान नहीं रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम इस प्रयास के पीछे की गंभीरता की प्रशंसा करते हैं और परमाणु हथियारों की भूमिका और सैन्य इस्तेमाल को कम करने की दिशा में काम करने के इच्छुक हैं, ताकि किसी भी परिस्थिति में उनके प्रयोग को रोका जा सके और इन अस्त्रों को दुनिया से खत्म किया जा सके।’’ पिछले वर्ष अक्तूबर में 120 से ज्यादा देशों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में परमाणु अस्त्रों पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी प्रस्ताव तैयार करने और उन्हें पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक सम्मेलन बुलाने के पक्ष में मतदान किया था। भारत ने इस प्रस्ताव पर मतदान नहीं किया था।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के स्थाई सदस्य अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, रूस और फ्रांस इस सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले रहे हैं।

कुल मिलाकर 40 से ज्यादा देश संयुक्त राष्ट्र के इस सम्मेलन का विरोध कर रहे हैं।

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