जजों के नाम पर घूस लेने का मामला:


डीकेएस डेस्क, नयी दिल्ली,
शुक्रवार, 10 नवम्बर को देश के सर्वोच्च न्यायालय में गर्मागर्मी का माहौल रहा। सुप्रीम कोर्ट के जजों के नाम पर रिश्वत मांगने के केस की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में हंगामा खड़ा हो गया। इस दौरान पांच जजों की पीठ ने खंडपीठ के फैसले को रद्द कर दिया। दो जजों की बेंच ने गुरुवार को इस मामले को एक अन्य बेंच को देने को कहा था, लेकिन शुक्रवार को चीफ जस्टिस (सीजेआई) दीपक मिश्रा की अगुआई वाली 5 जजों की बेंच ने रद्द कर दिया।
इस बेंच ने कहा- ’सीजेआई सुप्रीम कोर्ट के मुखिया हैं। उनके आवंटन के बिना कोई बेंच केस नहीं सुन सकती।’ सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की नेतृत्व वाली पीठ ने कहा कि किस मामले को कौन सुनेगा, इसका फैसला करना चीफ जस्टिस का काम है। मामले पर सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने मुख्य न्यायाधीश पर आरोप लगाए। वो चिल्ला कर बाहर निकल गए। चीफ जस्टिस ने कहा ऐसे आरोपों में संस्थान काम नहीं कर सकता। भूषण को न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने भी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि अगर कोई कहता है कि सीजेआई को इस मामले पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए तो क्या यह कोर्ट की अवमानना नहीं है। इसके बाद सीजेआई ने कहा, ‘‘मेरे खिलाफ कौन सी एफआईआर, यह बकवास है। एफआईआर में मुझे नामजद करने वाला एक भी शब्द नहीं है। हमारे आदेश को पहले पढ़ें, मुझे दुख होता है। आप अब अवमानना के लिए जिम्मेदार हैं।’’ भूषण ने पीठ को उन्हें अवमानना का नोटिस जारी करने की चुनौती दी और कहा कि उन्हें बोलने की अनुमति दिए बिना इस तरीके से सुनवाई नहीं चल सकती। लेकिन सीजेआई ने कहा कि आप अवमानना के लायक नहीं हैं। उन्होंने मीडिया के मामले को रिपोर्ट करने से रोकने के अनुरोध को खारिज करते हुए कहा कि वह अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता’ में भरोसा रखते हैं।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने प्रशांत भूषण की निंदा की। इससे पहले, ज्यूडिशियल फॉर एकाउंटबिलिटी एंड रिफॉर्म्स नामक एनजीओ की ओर से जिरह कर रहे वकील प्रशांत भूषण ने आग्रह किया था कि इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस मिश्रा न करें क्योंकि उनके खिलाफ भी एफआईआर है। हालांकि भूषण एफआईआर में उनका नाम नहीं दिखा सके। भूषण ने पीठ को उन्हें अवमानना का नोटिस जारी करने की चुनौती दी और कहा कि उन्हें बोलने की अनुमति दिए बिना इस तरीके से सुनवाई नहीं चल सकती। लेकिन सीजेआई ने कहा कि आप अवमानना के लायक नहीं हैं। भूषण सुनवाई के दौरान न्यायालय से यह आरोप लगाते हुए बाहर निकल गए कि अदालत ने सबको सुना, लेकिन उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

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