चारा घोटाला केस में मिश्र बरी, यादव दोषी !


-डीकेएस डेस्क, नई दिल्ली,
गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के कुछ समय पहले पूर्व केन्द्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुखराम अपने पूरे परिवार समेत भाजपा में शामिल हो गये, उसके कुछ दिन बाद पश्चिम बंगाल में शारदा चिटफंड घोटाले के मुख्य आरोपी और तृणमूल नेता मुकूल राय का भी भव्य स्वागत के साथ भाजपा में शामिल होना कोई अनोखी घटना नहीं थी। क्योंकि ’न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ जुमले के बाद भी भाजपा में तमाम भ्रष्टाचारी नेताओं का खुले दिल से भव्य स्वागत के साथ शामिल किया जाता रहा है।
गुरुवार,21 दिसंबर को दिल्ली की पटियाला हाउस स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने 2010 के चर्चित 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में मुख्य आरोपी डीएमके के ए. राजा और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि की बेटी कनिमोझी सहित सभी 25 आरोपियों को बरी कर दिया।जबकि आजादी के बाद इसे दूरसंचार क्षेत्र का सबसे बड़ा घोटाला बताया जाता है।
अब शनिवार,23 दिसम्बर को चारा घोटाले में सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा मामले में फैसला सुनाते हुए अदालत ने लालू यादव को दोषी करार दिया और अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के अलावा बिहार के पूर्व मंत्री विद्यासागर निषाद और पीएसी के तत्कालीन अध्यक्ष ध्रुव भगत, हार्दिक चंद्र चैधरी, सरस्वती चंद्र और साधना सिंह को दोषमुक्त करार कर दिया।
रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने शनिवार को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले में दोषी करार दिया है। 1991 से 1994 के बीच देवघर राजकोष से 85 लाख रुपए गबन के मामले में लालू प्रसाद को दोषी ठहराए गए हैं।
उन्हें अदालत परिसर में ही पुलिस कस्टडी में ले लिया गया है। अदालत तीन जनवरी को सजा सुनाएगी।
चारा घोटाले में रांची की विशेष अदालत से दोषी करार दिए जाने के बाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी प्रमुख लालू यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। अदालत के फैसले के बाद लालू के ट्विटर अकाउंट एक के बाद एक कई ट्वीट किए गए।लालू ने अपने पहले ट्वीट में कहा, ’संगठित हमले और पक्षपातपूर्ण प्रचारतंत्र से सच को झूठ की तरह पेश किया जा सकता है या उसे संदिग्ध बनाया जा सकता है। लेकिन चाहे जो हो जाए भेदभाव और द्वेष का जो मलिन आवरण है वो छंटेगा। आखिरकार सत्य को ही जीत मिलती है।’
लालू ने अपने दूसरे ट्वीट में कहा, ’धूर्त भाजपा अपनी जुमलेबाजी और कारगुजारियों को छुपाने और वोट प्राप्त करने के लिए विपक्षियों का पब्लिक पर्सेप्शन बिगाड़ने के लिए राजनीति में अनैतिक और द्वेष की भावना से ग्रस्त गंदा खेल खेलती है। झूठे जुमले बुनने वालों सच अपनी जिद पर खड़ा है। धर्मयुद्ध में लालू अकेला नहीं पूरा बिहार साथ खड़ा है।’
लालू ने कहा, ’नेल्सन मंडेला, मार्टिन लूथर किंग, बाबा साहेब आंबेडकर अपनी कोशिशों में नाकाम रहे थे और इतिहास ने उनके साथ खलनायक की तरह व्यवहार हुआ। ये अब भी भेदभाव करने वालों, नस्लवादियों और जातिवादी मानसिकता वालों के लिए खलनायक हैं। हमें किसी से अच्छे व्यवहार की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।’
लालू ने एक और ट्वीट में कहा, ’ऐ सुनो कान खोल कर, आप इस गुदडी के लाल को परेशान कर सकते हों, पराजित नहीं। सामंतीवादी ताकतों, जानता हूँ- लालू तुम्हारी राहों का काँटा नहीं आँखों की कील है। पर इतनी आसानी से नहीं उखाड़ पाओगे। ना जोर चलेगा लाठी का लालू लाल है माटी का।’
बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा, ’जो बोया वो पाया! बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होई। यह तो होना ही था।’
सीबीआई की विशेष अदालत ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले में दोषी करार दिया है। 1991 से 1994 के बीच देवघर राजकोष से 85 लाख रुपए गबन के मामले में लालू प्रसाद को दोषी ठहराए गए हैं।
उन्हें अदालत परिसर में ही पुलिस कस्टडी में ले लिया गया है। अदालत तीन जनवरी को सजा सुनाएगी।
विशेष सीबीआई अदालत ने जब चारा घोटाले में लालू यादव को दोषी करार दिया तो वे सन्न रह गए। लालू यादव के मुंह से निकल गया देखो न डॉक्टर साहेब (जगन्नाथ मिश्र) को छोड़ दिया हमको सजा दे दिया… गजबे किया। अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के अलावा बिहार के पूर्व मंत्री विद्यासागर निषाद और पीएसी के तत्कालीन अध्यक्ष ध्रुव भगत, हार्दिक चंद्र चैधरी, सरस्वती चंद्र और साधना सिंह को दोषमुक्त करार कर दिया। जबकि लालू सहित 16 लोगों को अदालत ने दोषी पाया है। इस मामले में दोषी ठहराये गए सभी 16 लोगों को हिरासत में लेकर बिरसा मुंडा जेल भेज दिया गया है।
अदालत ने 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की अवैध निकासी के मामले में फैसला सुनाया है। अवैध ढंग से धन निकालने के इस मामले में लालू प्रसाद यादव एवं अन्य के खिलाफ सीबीआई ने आपराधिक षड्यन्त्र, गबन, फर्जीवाड़ा, साक्ष्य छिपाने, पद के दुरुपयोग आदि से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120बी, 409, 418, 420, 467, 468, 471, 477 ए, 201, 511 के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) एवं 13(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
इस मामले में कुल 38 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से 11 की मौत हो चुकी है, वहीं तीन सीबीआई के गवाह बन गये जबकि दो ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया था जिसके बाद उन्हें 2006-07 में ही सजा सुना दी गयी थी। इसके बाद 22 आरोपी बच गए थे, जिनको लेकर यह फैसला सुनाया गया।

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