गौरी लंकेश और कलबुर्गी की हत्या एक ही देसी कट्टे से हुई थी !

डीकेएस डेस्क, नई दिल्ली,
कर्नाटक में पत्रकार गौरी लंकेश और तर्कशास्त्री एमएम कलबुर्गी की हत्या में एक ही बंदूक का इस्तेमाल किया गया था। एसआईटी सूत्रों ने राज्य की फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि होने का दावा किया है। एसआईटी को यह रिपोर्ट सौंप दी गई है। पुलिस की यह विशेष टीम पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की जांच कर रही हैद्य बेंगलुरू के एक कोर्ट में दाखिल किए गए चार्जशीट में यह दावा फॉरेंसिक रिपोर्ट के हवाले से किया गया है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि दोनों हत्याओं में एक ही देसी कट्टे का इस्तेमाल किया गया था। विशेष जांच टीम के 660 पन्नों की चार्जशीट में कलबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्या में 7.65 एमएम कट्टे के इस्तेमाल की बात कही गई है। बेंगलुरु की पत्रकार गौरी लंकेश हत्याकांड में पिछले साल गिरफ्तार केटी नवीन कुमार ने पुलिस को कथित तौर पर दिए अपने बयान में एक दक्षिणपंथी कार्यकर्ता को कारतूस देने की बात स्वीकार की है। नवीन कुमार ने अपने बयान में कहा है कि इस दक्षिणपंथी कार्यकर्ता ने उसे कारतूस का इस्तेमाल हिंदू विरोधी गौरी लंकेश की हत्या के लिए होने की बात बताई थी।
हिंदूवादी परंपराओं और अनुष्ठानों के खिलाफ अभियान चलाने वाले डॉक्टर एमएम कलबुर्गी की हत्या 30 अगस्त 2015 को कर दी गई थी। उत्तरी कर्नाटक के धारवाड़ में कुछ अज्ञात लोगों ने उनके घर के सामने उन्हें गोली मार दी थी। कलबुर्गी की हत्या पहले कम्युनिस्ट नेता गोविंद पनसारे और उनकी पत्नी की हत्या कोल्हापुर में गोली मार कर कर दी गई थी। पनसारे और उनकी पत्नी मॉर्निंग वॉक से घर लौट रहे थे।
वहीं, 5 सितंबर 2017 को गौरी लंकेश की हत्या बेंगलुरु में उनके घर के सामने कुछ अज्ञात लोगों ने कर दी थी। गोली चलने वाले व्यक्ति ने हेलमेट पहन रखी थी।
गौरतलब है कि कलबुर्गी की हत्या के तीन साल बाद भी अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इसलिए इस रिपोर्ट को अहम माना जा रहा है।

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