खुले में पेशाब न करने का अनुरोध पर दिल्ली परिवहन निगन के ड्राइवर और कंडक्टर ने कवि को घायल किया

kavi

नित्यानंद गायेन -घटना 22 फरवरी की रात 7:35 की है । कवि देवी प्रसाद मिश्र दिल्ली की सड़क( फुटपाथ )पर चल रहे थे, तभी डीटीसी की एक हरे रंग की लो फ्लोर बस आकर उनके सामने रुकी बस का नबर 1083 था। बस में से कंडक्टर उतरा और वह बस की आड़ में बस और फुटपाथ के बीच में खड़े होकर देवी प्रसाद मिश्र की तरफ मुह कह पेशब करने लगा । इस पर देवी जी ने एतराज किया और शिकायत की चेतावनी दी। इस बात पर बस संचालक ने देवी प्रसाद जी को गाली देते हुए देख लेने की धमकी दी । इसके बाद वह आदमी ( कंडक्टर ) देवी प्रसाद जी के साथ -साथ उन्हें डराने के लिए चलता रहा और गालियाँ देता रहा । देवी प्रसाद जी ने परिवहन विभाग में शिकायत दर्ज करवाने के लिए अपने मोबाइल से घटना को रिकार्ड करना शुरू किया । देवी प्रसाद जी को बस के भीतर खींचने की कोशिश की जब असफल रहा तो कंडेक्टर ने कवि पर हमला कर दिया । उन्हें बुरी तरह से पिटा कंडेक्टर का साथ देने के लिए बस का ड्राइवर भी उतर आया और फिर दोनों ने मिलकर देवी प्रसाद जी को बुरी तरह से मारा । उनकी नाक से खून निकल आया । बात यहीं नहीं रुकी लाल बत्ती पर रुकी हुई एक और बस से एक कर्मचारी उतर आया और कवि देवी प्रसाद मिश्र को मारा ।
कवि देवी प्रसाद मिश्र ने इस घटना के बाद एक वीडियो फूटेज में पूरी घटना के बारे में बताया उस वीडियो में उनकी नाक से निकलता खून जमा हुआ दिख रहा है ।
दिल्ली महान भारत देश की राजधानी है । यहाँ बलात्कार हो जाता है सड़क पर , यहाँ महिला प्रोफेसर पर पेट्रोल पम्प पर हमला होता है यह दिल्ली है यहाँ कवि को पिट देते हैं डीटीसी के गुंडे भी सड़क पर । कवि ने खुद पर हुए हमले के बाद एक जरुरी सवाल किया है – यहाँ किसकी सरकार है ? इस लोकतंत्र में आप गलत बात पर सार्वजनिक विरोध करेंगे तो आपकी ऐसी की तैसी कर दी जाएगी !
इस घटना पर वरिष्ठ पत्रकार -लेखक प्रिय दर्शन ने फेसबुक पर देवी प्रसाद मिश्र के वीडियो को साझा करते हुए लिखा है -ष्हिंदी को उसकी कई मार्मिक और मूल्यवान कविताएं देने वाले देवी प्रसाद मिश्र को कल एक बस के कंडक्टर और ड्राइवर ने पीटा- बस इसलिए कि उन्होंने कंडक्टर के खुलेआम पेशाब करने पर एतराज किया और शिकायत की चेतावनी दी। सामान्य समझदारी कहती है, ऐसी चीजों को अनदेखा करना चाहिए। वे भी आंख मूंद कर बढ़ जाते तो सुरक्षित रहते। लेकिन इस सामान्य समझदारी का जो कवच हम हमेशा पहने रहते हैं, वह कभी-कभी दरक जाता है। लिखने और बोलने की आदत प्रतिरोध के लिए मजबूर करती है। लेकिन उसका जो नतीजा होता है, वह देवी प्रसाद मिश्र ने कल रात भुगता। उनके इस वीडियो में खौफनाक कुछ भी नहीं है। बस उनकी नाक से निकलता खून जम गया है- बस उनकी आवाज बहुत आखिरी में कुछ कांपती और नम हो जाती है।
यह कोई कविता नहीं है, हमारे निष्ठुर समय का वह निरा गद्य है जिसमें संवेदनशीलता अपराध है, प्रतिरोध असहाय और कातर है, अट्टहास करती एक सामूहिक बर्बरता ही सच है, एक कवि की नाक से बहता खून ही यथार्थ है। जिस वक्त रामजस कॅालेज परिसर में कुछ गुंडे पुलिस के मौन संरक्षण में छात्रों और शिक्षकों को पीट रहे थे, उस वक्त पूर्वी दिल्ली के एक हिस्से में एक कवि अपने चेहरे पर घूंसे झेल रहा था। क्या ये दोनों कथाएं आपस में मिलती और कुछ कहती हैं?

लेखक के बारे में

उत्तर छोड़ दें