खराब मशीनों के भरोसे चल रहा है जीटीबी अस्पताल

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भाषा: दिल्ली में पूर्वी इलाके का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल खराब मशीनों के भरोसे चलने को मजबूर है। अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं का दावा कर रही दिल्ली सरकार के गुर तेग बहादुर अस्पताल में आलम यह है कि इमरजेंसी वार्ड तक में आधे से ज्यादा अहम उपकरण सालों से खराब पड़े है। सूचना के अधिकार :आरटीआई: कानून के तहत अस्पताल प्रशासन के जवाब में यह खुलासा हुआ है।
सामाजिक कार्यकर्ता राजहंस बंसल के आरटीआई आवेदन पर हाल ही में अस्पताल के सभी विभागों में कार्यरत और खराब पड़े उपकरणों का विस्तृत ब्यौरा उपलब्ध कराया गया है। इसमें दुर्घटना एवं आपात विभाग में जीवन रक्षक श्रेणी के 153 उपकरणों में से 60 उपकरण खराब हैं। इनमें 6 ऑक्सीपल्स मीटर में से 5 और 37 लेरिंगोस्कोप में 20 खराब हैं। विभाग के पास मौजूद 9 में से 5 ईसीजी मशीनें काम नहीं कर रही हैं।

इससे भी बुरा हाल केजुअल्टी विभाग का है। इसमें वेंटीलेटर, आईसीयू वेंटीलेटर और गंभीर मरीजों की नब्ज पर नजर रखने वाले वाइटल साइन मॉनीटर जैसे उपकरण पिछले दो सालों से खराब हैं। जबकि बायोकेमिस्ट्री विभाग में 13 हजार से 98 हजार अमेरिकी डॉलर में आयातित महत्वपूर्ण उपकरण इलेक्ट्रोलाइट एनालाइजर और केमिस्ट्री एनालाइजर पिछले एक दशक से खराब पड़े हैं।

चौंकाने वाले आंकड़े इमरजेंसी लैब से सामने आए हैं। गंभीर मरीजों के जरूरी परीक्षण के लिए बनाई गई इमरजेंसी लैब में साल 2003 में खरीदी गयी ब्लड सैल कांउटर मशीन को इस्तेमाल किये जाने के बाद से कभी सटीक परिणाम नहीं मिले। लिहाजा मशीन साल 2004 से ही कार्यरत नहीं है। जबकि बायोकेमिस्ट्री सेमी ऑटोएनालाइजर मशीन 6 साल से खराब है। इसकी निर्माता कंपनी मशीन को ठीक करने के बारे में सूचित किये जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं दे रही है। कुछ खराब मशीनें ऐसी भी हैं जिन्हें दुरस्त कराने के लिए आपूर्तिकर्ता कंपनी की खोज ही पूरी नहीं हो पा रही है।

वहीं माइक्रोबायलॉजी विभाग में इंक्यूबेटर सहित 61 महत्वपूर्ण मशीनों में से 26 खराब हैं। जबकि डायलसिस में काम आने वाले आईसीयू वेंटिलेटर, वाइटल साइन मॉनीटर और कार्डिक मॉनीटर जैसे अहम उपकरण 3 से 4 सालों से खराब पड़े हैं।

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