कुछ देशों के लिए बदला गया ईज ऑफ बिजनेस की रैंकिंग का तरीका


डीकेएस डेस्क, नई दिल्ली,
वर्ल्ड बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री पॉल रोमर ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग पर सवाल उठाए हैं उन्होंने कहा है कि रैंकिंग तय करने का तरीका गलत और भ्रामक है। इसे कुछ खास देशों के लिए बदला गया। पॉल रोमर ने बिजनेस अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के साथ बातचीत में ये आरोप लगाए
पॉल रोमर की ओर से की गई इस घोषणा के बाद ईज ऑफ डुइंग बिजनस रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े हो गए हैं.विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री पॉल रोमर ने कहा है कि कारोबार में प्रतिस्पर्धा के बारे में राष्ट्रीय रैंकिंग की नए सिरे से गणना की जाएगी। कम-से-कम चार वर्षों की रैंकिंग की नए सिरे से गणना होगी। यही नहीं रोमर ने चिली से व्यक्तिगत रूप से माफी भी मांगी है। चिली की रैंकिंग 2014 के 34 से फिसलकर 2017 में 57 पर पहुंच गई। रोमर ने कहा, श्मैं चिली से व्यक्तिगत रूप से माफी मांगता हूं। साथ ही किसी भी अन्य देश से माफी चाहता हूं जहां हमने गलत धारणा बना दी है।श् भारत की रैंकिंग 2014 के 140 से उछलकर 2018 में 100 पर पहुंच गई। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के साथ जो समस्या है, वह मेरी गलती है क्योंकि हम चीजों को अधिक स्पष्ट नहीं कर पाए।
रोमर के साक्षात्कार के बाद विश्व बैंक ने एक बयान में कहा है कि वह कारोबार सुगमता रिपोर्ट में चिली के संकेतकों की समीक्षा करेगा। हालांकि, विश्व बैंक के प्रवक्ता डेविड थेइस ने चिली के इन आरोपों को खारिज किया है कि कारोबार सुगमता रैंकिंग के पीछे राजनीतिक प्रभाव है। उन्होंने कहा कि 15 साल के दौरान ईज ऑफ डुइंग इंडेक्स देशों के लिए अपने कारोबारी माहौल में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। इनमें हजारों की संख्या में सुधारों को देखा जाता है। हालांकि, रोमर ने इन सब से असहमति जताई है। उन्होंने कहा कि विश्व बैंक का स्टाफ लगातार किसी देश की रैंकिंग की गणना के तरीके को बदलता रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें रिपोर्ट की ’ईमानदारी’ पर भरोसा नहीं है।
रोमर ने कहा कि विश्व बैंक पुरानी रिपोर्टों को ठीक करने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है और उन्हें नए सिरे से प्रकाशित करेगा। इसमें यह बताया जाएगा कि तरीके में बदलाव के बिना रैंकिंग क्या होती। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, रोमर ने कहा कि वह उस प्रक्रिया की विश्वसनीयता का बचाव नहीं कर सकते जिनकी वजह से गणना का तरीका बदला है। ईओडीबी रैंकिंग की गणना के तरीके में पिछला प्रमुख बदलाव रोमर के पूर्ववर्ती कौशिक बसु के समय हुआ था। बसु भारत के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री हैं और फिलहाल वह प्रतिष्ठित कॉर्नेल विश्वविद्यालय में सी मार्क्स अंतरराष्ट्रीय अध्ययन और अर्थशास्त्र के प्रफेसर हैं। बसु 2012 से 2016 तक विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री रहे।

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