उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव में भाजपा की जीत, जहां ईवीएम वहां भाजपा शेर, जहां मतपत्र वहां ढेर:आप


-नित्यानंद गायेन द्वारा सम्पादित, नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश में निकाय चुनावों में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की भारी जीत के बाद जहाँ आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास ने बीजेपी को बधाई दी थी वहीं आम आदमी पार्टी (आप) ने ईवीएम में गड़बड़ी का मुद्दा एक बार फिर उठाते हुये उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा की जीत के लिये वोटिंग मशीन को जिम्मेदार ठहराया है। आप के उत्तर प्रदेश के प्रभारी संजय सिंह ने शनिवार,2 दिसम्बर को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भाजपा ने उन्हीं पदों पर जीत दर्ज की है जिन पर ईवीएम से मतदान हुआ था, लेकिन मतपत्र से मतदान वाले पदों पर भाजपा हारी है।
सिंह ने ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा ‘‘सच्चाई यह है कि भाजपा नगर निगम चुनाव में ही बहुमत के साथ जीती है क्योंकि वहां ईवीएम से मतदान कराया गया। जबकि नगर पंचायत और नगर पालिका परिषद के चुनाव में मतपत्र से वोट डाले गए, तो भाजपा को बेहद कम सीटें मिलीं। इससे साफ है कि जहां ईवीएम का इस्तेमाल हुआ वहां भाजपा शेर, जहां मतपत्र से मतदान हुआ वहां ढेर हो गई.’’सिंह ने कहा, ‘आप लगातार यह कह रही है कि जब तक ईवीएम से चुनाव होंगे तब तक भाजपा और मोदी जी जीतते रहेंगे। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर यह बात सच साबित हुई।ईवीएम के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि ईवीएम में गड़बड़ी का मुद्दा आप भविष्य में भी उठाती रहेगी। सिंह ने कहा, ‘हमने पहले भी चुनाव आयोग को ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायत की है और अब फिर आयोग के समक्ष इसकी शिकायत करेंगे।’ आप नेता संजय सिंह व आशुतोष ने शनिवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि चुनाव आयोग भाजपा के एजंट की तरह काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ईवीएम के जरिए किए जा रहे फर्जीवाड़े को लेकर एक बार फिर से आयोग के समक्ष जाएगी। उन्होंने आंकड़े जारी करते हुए कहा कि 16 स्थानों पर महापौर के चुनाव ईवीएम से हुए, जिनमें से 14 स्थानों पर भाजपा जीती, लेकिन 438 नगर पंचायत अध्यक्षों के चुनाव मतपत्रों से हुए तो इनमें भाजपा महज 100 सीटों पर जीती और 337 पर हार गई। इसी प्रकार नगरपालिका परिषद अध्यक्ष के 198 पदों के लिए हुए चुनाव में से भाजपा केवल 68 सीटें ही जीत पाई, बाकी 127 सीटों पर हार गई। नगर पंचायत के 5434 पदों के लिए हुए चुनाव में भी भाजपा 914 में ही जीत पाई, बाकी 4300 से ज्यादा सीटों पर वह हारी है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि जहां ईवीएम से वोट पड़े वहां भाजपा जीती और जहां मतपत्रों से वोट डाले गए, वहां वह बुरी तरह हारी।संजय सिंह ने कहा कि यूपी के नतीजों पर मीडिया से लेकर आम लोगों के बीच शोर मचाया जा रहा है, मानो भाजपा ने कोई बहुत बड़ी जीत दर्ज कर ली है, लेकिन सच्चाई कोई बताने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि सिर्फ गुजरात चुनाव में माहौल बनाने के लिए ऐसा किया जा रहा है,जबकि हकीकत यह है कि भाजपा केवल ईवीएम वाले स्थानों पर ही जीती है, बाकी जगहों पर उसकी करारी हार हुई है। यह सच भी कि चुनाव के दौरान कई जगहों से ईवीएम में गड़बड़ी खबरें मीडिया में आती रहीं पर उन खबरों पर किसी ने विशेष ध्यान नहीं दिया और भाजपा जीत गई। आंकड़े देखें तो उत्तर प्रदेश के हालिया चुनाव में जिन वार्डों में ईवीएम से वोटिंग हुई हैं, वहाँ 45.85ः जीत भाजपा की हुई और जहाँ बैलेट से वोटिंग हुई है वहाँ भाजपा की जीत का प्रतिशत केवल 14.85ः रह गया। इस बीच कल यानी 3 दिसंबर, रविवार को चुनाव आयोग ने कहा है कि गुजरात के 182 विधानसभा क्षेत्रों में हर क्षेत्र के मतदान केंद्र पर हुई वोटिंग का ईवीएम और वीवीपैट की पर्चियों से मिलान किया जाएगा। अहमदाबाद में मुख्य चुनाव आयुक्त एके ज्योति ने इसकी जानकारी दी। ं एक प्रेस वार्ता में मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि सभी 182 विधानसभाओं के 50,264 बूथों पर ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के साथ वीवीपैट (वोटर वेरिफाएबल ऑडिट ट्रेल) मशीनें लगाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि अगर किसी उम्मीदवार को लगता है कि ईवीएम में गड़बड़ी है तो वह रिटर्निंग ऑफिसर को बता सकता है। रिटर्निंग ऑफिसर वीवीपैट मशीनों से पर्ची निकालकर उसी समय ऐसी संभावना की जांच कर सकता है। गुजरात में दो चरणों में 9 और 14 दिसंबर को चुनाव होना है।

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